मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए SAAC का शुभारंभ, NAAC मानकों पर संस्थानों को मिलेगा मार्गदर्शन
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने भोपाल में राज्य स्तरीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन प्रकोष्ठ (SAAC) का शुभारंभ किया। SAAC महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को NAAC मानकों, गुणवत्ता सुधार, प्रशिक्षण और प्रत्यायन प्रक्रिया में मार्गदर्शन देगा।
भोपाल।
मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा ही विकसित मध्यप्रदेश और विकसित भारत की मजबूत आधारशिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) से बेहतर ग्रेड प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगारपरक, नवाचार आधारित, मूल्यपरक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।
वे भोपाल में राज्य स्तरीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन प्रकोष्ठ (State Level Assessment and Accreditation Cell-SAAC) के शुभारंभ, उसके आधिकारिक लोगो के अनावरण तथा IQAC समन्वयकों के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
SAAC देगा महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को तकनीकी सहयोग
मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि प्रदेश में उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता बढ़ाने, संस्थागत उत्कृष्टता विकसित करने तथा NAAC के मानकों के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से SAAC का गठन किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह प्रकोष्ठ महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को मूल्यांकन एवं प्रत्यायन प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, मार्गदर्शन और सतत परामर्श उपलब्ध कराएगा। इससे संस्थान अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और अधिक सुदृढ़ बना सकेंगे।
341 संस्थानों के IQAC समन्वयकों को मिलेगा प्रशिक्षण
उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश के 341 शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों के IQAC समन्वयकों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस प्रशिक्षण में गुणवत्ता मानकों, दस्तावेजीकरण, संस्थागत सुधार, प्रत्यायन प्रक्रिया और गुणवत्ता आधारित कार्य संस्कृति विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब संस्थानों को केवल NAAC प्रत्यायन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप स्वयं को तैयार करना होगा।
NEP-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
इंदर सिंह परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को उच्च शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि महाविद्यालयों में रिक्त पदों पर लगातार भर्ती की जा रही है और विश्वविद्यालयों में भी रिक्त पदों को शीघ्र भरने की प्रक्रिया जारी है।
समय पर प्रवेश, परीक्षा और परिणाम सरकार की प्राथमिकता
मंत्री ने कहा कि समयबद्ध प्रवेश, नियमित कक्षाएं, निर्धारित समय पर परीक्षाएं और समय पर परिणाम घोषित करना सभी शिक्षण संस्थानों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही प्राध्यापकों की उपस्थिति ‘सार्थक ऐप’ के माध्यम से दर्ज की जा रही है और भविष्य में विद्यार्थियों की उपस्थिति भी इसी व्यवस्था से सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
NAAC केवल ग्रेड नहीं, गुणवत्ता का पैमाना
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि NAAC केवल ग्रेड देने वाली संस्था नहीं है, बल्कि किसी भी संस्थान की गुणवत्ता, कार्यसंस्कृति, नवाचार, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व का समग्र मूल्यांकन करती है।
उन्होंने सभी महाविद्यालयों से पुस्तकालय, आधुनिक प्रयोगशालाएं, खेल सुविधाएं, हरित परिसर, अनुसंधान, इंटर्नशिप, उद्योगों से समन्वय, डिजिटल शिक्षण और विद्यार्थी सहभागिता को संस्थागत संस्कृति का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग की तैयारी
अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने SAAC को नियमित प्रशिक्षण आयोजित करने तथा संस्थानों को QS World University Rankings जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करने के निर्देश दिए।
वहीं, आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा ने कहा कि SAAC राज्य में गुणवत्ता, नवाचार, अनुसंधान और सुशासन की संस्कृति विकसित करने का प्रभावी मंच बनेगा।
कार्यक्रम में अतिरिक्त संचालक मथुरा प्रसाद, SAAC की सदस्य सचिव एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. उषा के. नायर, शिक्षाविद, विषय विशेषज्ञ, प्राचार्य और प्रदेशभर से आए IQAC समन्वयक उपस्थित रहे।
